क्या है 'ऑकस' (AUKUS)
ऑकस यानी ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस. इन तीनों देशों के बीच हुए इस रक्षा समझौते को 'ऑकस' नाम दिया गया है।
इसमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर साझेदारी भी शामिल है।
ऑकस सुरक्षा समझौते पर एक संयुक्त बयान जारी कर कहा गया है, "ऑकस के तहत पहली पहल के रूप में हम रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
"इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और ये हमारे साझा मूल्यों और हितों के समर्थन में तैनात होंगी।"
इन पनडुब्बियों के मिलने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन सात देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिनके पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियाँ होंगी।
इससे पहले अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, भारत और रूस के पास ही ये तकनीक थी।
ये पनडुब्बियाँ पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियों से ज़्यादा तेज़ होंगी और और इनका पता लगाना बेहद कठिन होगा।
ये महीनों तक पानी में डूबे रह सकती हैं और मिसाइलों से लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं. ये समझौता इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले 50 सालों में अमेरिका ने अपनी सब-मरीन तकनीक, ब्रिटेन के अलावा किसी के साथ साझा नहीं की है।

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