Ad Code

Responsive Advertisement

Ticker

6/recent/ticker-posts

Konark Sun Temple: 13वीं शताब्दी में हुआ था सूर्य मंदिर का निर्माण, जानें क्या है इसका महत्व भारतीय कला एवं संस्कृति


Konark Sun Temple: 13वीं शताब्दी में हुआ था सूर्य मंदिर का निर्माण, जानें क्या है इसका महत्व भारतीय कला एवं संस्कृति
🏜 भारतीय कला एवं संस्कृति 🏜


          🕌 कोणार्क मंदिर 🕌


🔸 कोणार्क सूर्य मंदिर पूर्वी ओडिशा के पवित्र शहर पुरी के पास स्थित है।

🔹 इसका निर्माण राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा 13वीं शताब्दी ((1238-1264 ई) में किया गया था। यह गंग वंश के वैभव, स्थापत्य, मज़बूती और स्थिरता के साथ-साथ ऐतिहासिक परिवेश का प्रतिनिधित्व भी करता है।

🔸 मंदिर को एक विशाल रथ के आकार में बनाया गया है। यह सूर्य भगवान को समर्पित है। इस अर्थ में यह सीधे भौतिक रूप से ब्राह्मणवाद और तांत्रिक विश्वास प्रणालियों से जुड़ा हुआ है।

🔹 कोणार्क के मंदिर न केवल अपनी स्थापत्य की भव्यता के लिये बल्कि मूर्तिकला कार्य की गहनता और प्रवीणता के लिये भी जाना जाता है।

🔸 यह कलिंग वास्तुकला की उपलब्धि का सर्वोच्च बिंदु है जो अनुग्रह, खुशी और जीवन की लय को दर्शाता है।

🔹 इसे वर्ष 1984 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

🔸 कोणार्क सूर्य मंदिर के दोनों ओर 12 पहियों की दो पंक्तियाँ हैं। कुछ लोगों का मत है कि 24 पहिये दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं, जबकि अन्य का कहना है कि 12-12 अश्वों की दो कतारें वर्ष के 12 माह की प्रतीक हैं।

🔹 सात घोड़ों को सप्ताह के सातों दिनों का प्रतीक माना जाता है।

🔸 समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे, क्योंकि ऐसा माना जाता था कि यह जहाज़ों को किनारे की ओर आकर्षित करता है और उनको नष्ट कर देता है।

🔹 कोणार्क ‘सूर्य पंथ’ के प्रसार के इतिहास की अमूल्य कड़ी है, जिसका उदय 8वीं शताब्दी के दौरान कश्मीर में हुआ, अंततः पूर्वी भारत के तटों पर पहुँच गया।

Post a Comment

0 Comments

Ad Code

https://youtu.be/aqexnGrs1oU

Followers